अपनेपन के नाम पर लोगो को परेशां करता हूँ
वरना किसी की मशरूफियत में खलल मेरी फितरत नहीं
अजाँ कहती फज़र की नमाज़ का वक़्त हो चला
मैं कहता ख्वाबगाह से बाहर आने की मेरी हिम्मत नहीं ......
वरना किसी की मशरूफियत में खलल मेरी फितरत नहीं
अजाँ कहती फज़र की नमाज़ का वक़्त हो चला
मैं कहता ख्वाबगाह से बाहर आने की मेरी हिम्मत नहीं ......
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