Sunday, 10 July 2022

मयकशी मेरी फ‍ितरत में है न मेरे खून में है
ये न मेरे शौक में है न जुनून में है...

न रूह से न सूकून से बावस्ता है 
न ये मेरे वक्त काटने का रस्ता है...

न गम हल्के होते हैं न खुशियां बढ़ती हैं 
न सहूल‍ियतें होती है न मुश्क‍िलें कटती हैं...

हां मेरा हमप्याला अपना सा लगने लगता है
इससे रोना और हंसना आसां सा लगेन लगता है...

No comments: