Rahul.atisheeyokti
Monday, 9 June 2014
के हरेक शख्स ने अपन शख्सियत पे एक लबादा ओढ़ रखा है
मज़मून कुछ और है किताब का, ज़िल्द पे नाम कुछ और लिखा है ........
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