तुम नादानियाँ करो हम उसपे पर्दा करें
मैं तुम्हें माफ़ करूँ और मुझे ख़ुदा करे
आँखों के रस्ते दिल में उतरूं कैसे भला
जब मेरा महबूब ही मुझसे पर्दा करे
उसे गुमान हुस्न पर नहीं शक़ मेरी नीयत पे है
वो तो हिज़ाब के बहाने मेरी आँखों पे पर्दा करे
मक़बूल होने का एक रास्ता ये भी था
वो परदे की चीज़ें भी पर्दे पे बेपर्दा करे
क्या इतना मुश्किल था कवाईद मज़हब का
जो वो एक नुक्ते से ख़ुदा को जुदा करे
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